“क्या बात है अम्मा? XXX Hindi हम आख़िर आकर नई जगह बस गये यहाँ मैंने सभी को यही बताया कि मैं अपनी पत्नी के साथ हू हमारा संभोग तो अब ऐसा बढ़ा कि रुकता ही नहीं था सुबह उठ कर, फिर काम पर जाने से पहले दोपहर में खाने पर घर आने के बाद, शाम को लौटकर और फिर रात को जब मौका मिले, मैं बस अम्मा से लिपटा रहता था, उस पर चढा रहता था.माँ की वासना भी शांत ही नहीं होती थी कुछ माह हमने बहुत मज़े लिए फिर आठवें माह से मैंने उसे चोदना बंद कर दिया मैं उसकी चुनमूनियाँ चूस कर उसे झडा देता था और वह भी मेरा लंड चूस देती थी घरवालों को मैंने अपना पता नहीं दिया था, बस कभी कभी फ़ोन पर बात कर लेता था.आख़िर एक दिन माँ को अस्पताल में भरती किया दूसरे ही दिन चाँद सी गुडिया को उसने जन्म दिया माँ तो खुशी से रो रही थी, अपने ही बेटे की बेटी उसने अपनी कोख से जनी थी वह बच्ची मेरी बेटी भी थी और बहन भी माँ ने उसका नाम मेरे नाम पर राज़ी रखा. इसके बाद हमारा घूमने जाना बंद हो गया मेरे बहुत आग्रह करने पर भी वह मेरे साथ नहीं आती थी और कहती थी कि मैं किसी अपनी उम्र की लड़की के साथ पिक्चर देखने जाऊ.मुझसे वह















