माँ ने पिताजी को खुश कर दिया. हिंदी XXX समधन की चूत मे दर्द की बारिश होने लगी. समधन की लाल गांड देख कर उनका जोश बढ़ रहा था.पिताजी ने वापस लंड गांड मे डाला और धक्के मारने लगे. कि हर कोई उसकी खुश्बू सूंघना चाहे. माँ समधन के दूध दबाना शुरू करके समधन का हौंसला बढ़ा रही थी.पिताजी भी कुछ देर वैसे ही रुक गये. दर्द ?माँ- क्या हो रहा है.समधन- अभी तो दर्द हुआ था. क्या नज़ारा था. ऐसा लग रहा था कि सच मे पिताजी अपनी समधन की गांड मार रहे हो.ये कपड़े ना होते तो सच मे गांड मे लंड होता. तुम्हे भी नही होगा. धक्के मारने को कहूँ..समधन- हाँ, पर वो दर्द तो बहुत हो रहा था और अब बहुत कम हो रहा है.और पिताजी धीरे धीरे धक्के मारने लगे. आधा लंड डालने के बाद पिताजी रुक गये .समधन को लगा कि लंड चला गया.पर आधा लंड डालने के बाद पिताजी एक झटके मे बाकी का लंड डालते है. मेरी सास बार बार पिताजी के सामने से गुजर रही थी पर आज पिताजी ने जानबूझ समधन से बात करने से खुद को रोक लिया.समधन को लगा कि रात की वजह से वो खुद को गुनहगार समझ रहे होगे. क्या धक्के लग रहे थे. पिताजी को आज शीष्कारियाँ सुनने लायक मज़ा नही आ रहा था पर कल गांड मारने मे















