चोरी चोरी चोर नजरों से उसके नजर आने की राह देखने लगी …वो मुझे अच्छा लगने लगा… मामाजी के यहाँ जाते समय भी देखा लेकिन वो नहीं दिखा…..तीन दिन बाद मामाजी के यहाँ से आई तो भी मुझे उसके दिखने का इन्तजार था….शाम को मैं छत पर गई तो वो दिखा ….लेकिन नजरें नीचे किये नीचे उतर गया… उफ्फ्फ जालिम….. क्या वो गलत था या अब मैं गलत हूँ……सोच सोच कर सर फटने लगा है…..आह…अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- मुझे लगने लगा कि वो मुझे मसल डाले… और जोर से…मेरे मुँह से ऊं ऊं… करके आवाज निकलने लगी तो उसने अपना मुह मेरे होंटों से अलग किया और मेरा कुरता ऊँचा करके बोबे नंगे करने लगा… बोबे देखकर जैसे वो पागल हो गया… वो उन्हें चूमने लगा फिर चुचूक मुँह में लेकर चूसने लगा…अब मेरी रही सही हिम्मत भी चली गई, मैं बिल्कुल उसकी मेहरबानी पर निर्भर हो गई… मेरे हाथ धीरे से उठे और उसके बाल सहलाने लगे.. XXX Hindi प्लीज…लेकिन उसने हाथ नहीं छोड़ा…उसकी हालत देखकर मुझे लगा कि वो शायद ठीक से सो भी नहीं पाया है और कुछ परेशान भी है…फिर उसने धीरे धीरे अटक अटक कर बोलना शुरू किया- मैं कुछ दिन से बहुत……परेशान हूँ, ठीक से ..















