दिन भर घर में पड़े पड़े ऊब जाते हैं इसलिये शाम को चार बजे बाजार घुमने चले जाते हैं, चलने में दिक्कत होती है इसलिये धीरे धीरे चलते हैं.वापिस लौटने में उन्हें दो तीन घंटे लग जाते हैं, पति के मित्रों से हंसी मजाक करने का मुझे यही समय मिलता था, वे हर रोज आकर बैठते भी नहीं थे. XXX Hindi ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.“तुम्हारी पतली कमर बड़ी कातिल है, जब जब नजर पड़ती थी आह भर कर रह जाता था.”मैंने धीरे से चुटकी ली “यानि नीयत पहले से खोटी है?”वे एकदम से आवेश में आ गये, उन्होंने मुझे कंधे से अलग करके चीत गिरा दिया, मेरे दोनों पाँव उनकी गोद में ही सिकुड़े पडे थे, उन्होंने मेरे पांव के पंजों को दोनों हांथों में उठा लिया और पल भर तक घुर घुर कर देखने के बाद जी जान से चूमने लगे, ” तुम्हारे पांव तो कमल के फूल जैसे हैं, ऐसे ही पांवों को चरणकमल की उपाधि दी गई है.”मेरे पांवों को चुम चुम कर पापा जी ने मुझे आसमान के सिंहासन पर बैठा दिया था, इतनी प्रशंशा पहले किसी के मुंह से नहीं सुनी थी, पति से भी नहीं, मुझे बहुत अच्छे पुरुष लगे पापा जी, पांवों को छोड़ कर पापा जी ने दोनों हाँथ मेरी कमर में डाल कर पहले तो उसे नापा फिर















