वो मेरे समीज के ऊपर से भी मेरी चूचियों को दबाने लगे। फिर गले के पास ऊपर से मेरी चूचियों को टटोलने लगे। फिर पकड़ आया फिर वो मसलने लगे। मुझे तो ऐसा लग रहा था की मैं जन्नत में हूँ।दोस्तों फिर मैं खुद ही उनके बेड पर लेट गई। पैर झूला कर यानी मेरा पैर जमीं से सट रहा था और बेड पे लेटी हुई थी। वो मेरे ऊपर चढ़ गए और मुझे चूमने लगे। मैं लजा रही थी। सरमा रही थी। अपने चूचियों को दबाने से बचा भी रही थी एक दूसरे पैरों को सटा रही थी ताकि वो आराम से मेरी चूत को छुए नहीं।ऐसा भी नहीं था चुदना नहीं चाह रही थी पर एक अलग ही एहसास था उस समय आसानी से कुछ देना भी नहीं चाह रही थी। दोस्तों फिर क्या था उन्होंने मेरा नाडा खोल दिया और फिर से मेरे ऊपर लेट गए। उन्होंने बोला चोद दूँ। तो मैं बोली धीरे से करना दर्द नहीं होने चाहिए। “Muslim Teen First Sex”वो बोले ठीक है दर्द नहीं होगा और वो मेरी सलवार को निचे कर दिए। दोस्तों मैं उस समय ना तो पेंटी पहनी थी ना तो ब्रा। उन्होंने मेरी चूत को देखा तो बोले आफरीन क्या तुम बर्दाश्त कर पाओगी। मैं बोली जल्दी करो। यानी मैं सीधी जवाव नहीं देना चाहती थी।उसके बाद उन्होंने मेरा पैर















