तो बबिता भी दीदी की गाण्ड में अपनी गाण्ड टकराने लगी.. तुम्हारी मेहनत..मैं- मेरी मेहनत?बबिता- हाँ तुम्हारी मेहनत सविता के फिगर पर.. XXX Hindi तो उनकी चूत सामने दिखने लगी और बिना बाल का पूरा साफ़-सुथरी गुलाबी चूतें मेरे नज़रों के सामने थीं।तभी मैं दीदी की चूत की तरफ़ बढ़ने लगा और उसकी चूत को चाटने लगा तो बबिता भी दीदी की जाँघों को सहलाने लगी और दीदी की चूचियों को चूसने लगी। मैं इधर चूत को चूसता रहा और बबिता दीदी की चूचियों को दबाने लगी.. सो मैंने दीदी को गोद में उठाया और उसकी चूत के पास लंड सटा कर झटके मारने लगा। तभी मैंने देखा की बबिता भी रबर के लंड को पहन कर आ गई। मैं ये देख कर समझ गया कि इसका क्या इस्तेमाल होगा। मैं उसको देख कर मुस्कुरा दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.बबिता- दीदी ने एक साथ दो लंड का मजा नहीं लिया है.. और रोज की तरह चुदाई कर रहे थे.. लेकिन जब भी मैं झटके मारता.. आज हम दोनों मिल कर इसको चोदेंगे।बबिता- हाँ ये सही रहेगा.. सो मैं रुक गया बबिता के उस रबर वाले लंड को पकड़ कर दीदी की गाण्ड के छेद के पास ले गया। मैंने इशारा किया और तभी बबिता ने झटका मारा..















