इस पार्क में बहुत से जोड़े आकर चुदाई करते थे, इसलिए मुझे कोई टेंशन नही थी.निशा की आँखें बंद थी, मेरी आँखें भी बंद थी, मैं उसके होठ पी रहा था. हिंदी XXX घंटों हम दूसरे से लिपटा झपटी करते रहे. मुझे लगा की मैंने आज सब कुछ पा लिया हो. हेलो दोस्तों, मेरा नाम शिवांश है, मेरी गाँव में एक लड़की थी जिसका नाम निशा था. बिल्कुल खोये जैसे. उसमें दूध को मैंने मुँह में किसी लालची लोमड़ी की तरह भर लिया.मैं निशा के दूध पीने लगा. बड़ी रंगीन दोपहर थी वो. वो मुझे देख कर हस्ती थी. चुदवाने से उसकी छातियों में और रस भर रहा था. वो भी मुँह चला चलाकर मेरे होंठ पीने लगा. नमकीन नमकीन नमकीन स्वाद मेरी जीभ को मिला. एक अजीब सी सरसरी पुरे बदन में हो रही थी. इस तरह एक नया पोज मिला और जादा गहरी पहुच निशा की बुर में मिलने लगी. धीरे धीरे हम दोनों एक दूजे के होंठ पीते पीते गरमाने लगे. मैंने निशा की बुर का खूब जीभरके भोग लगाया. मैं उसकी घनी घनी झाटों को सुहरा सुहराकर उसकी चूत पी रहा था. मैंने उसको अपने पर उसी तरह लिटा लिया जैसे शरारती बच्चे आम की लता को पकड़ के झुका लेते है और आम तोड़ लेते है. मैं उसको तेज तेज चोदने लगा तो उसके दूध और जोर जोर से















