शर्म नाम की चिड़िया उड़कर बहुत दूर जा चुकी थी।“अब असली चीज !” उसके पहले अरुण ने उंगली घुसाकर छेद को खींचकर फैलाने की कोशिश की, “रिलैक्स … रिलैक्स .. “अरुण, दरवाजा खोलो।”मनीष उसके हॉस्टल से आया था। उसको मालूम था कि अरुण यहाँ है। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे। लड़कियों के कमरे में लड़का घुसा हुआ और दरवाजा बंद? हिंदी XXX लाओ मुझे दो।”उठकर अरुण के लिंग को खींचकर अपने मुँह में ले लेती है। मैं ऐसी जगह पहुँच गई हूँ जहाँ उसे यह करते देखकर गुस्सा भी नही आ रहा।छवि कुछ देर तक लिंग को चूसकर पूछती है,”अब तैयार हो ना? फिर अरुण ने कैसे लिया?”“उसने तो उसे समस्या से निकाला। तुमने क्या किया?”मनीष नहीं मानता। “नहीं मैं करूँगा।”अरुण कपड़े पहन रहा है। उसका हमदर्दी दोस्त के प्रति है। कमीज के बटन लगाते हुए कहता है, ”करने दो ना इसे भी।”छवि गुस्से में आ जाती है, “तुम लोग लड़की को क्या समझते हो? मुझे क्या मिलेगा?”सुनकर छवि एक क्षण तो अवाक रही फिर खिलखिलाकर हँस पड़ी,”वाह, क्या बात है !”अरुण इतनी सुंदर लड़की को न केवल मुफ्त में ही भोगने को पा रहा था, बल्कि वह इस ‘एहसान’ के लिए ऊपर से कुछ मांग भी रहा था। मेरी ना-नुकुर पर यह उसका जोरदार दहला था।“सही बात है।” छवि ने समर्थन किया।“देखो, मुझे नहीं लगता यह मुझसे















