प्लीज…लेकिन उसने हाथ नहीं छोड़ा…उसकी हालत देखकर मुझे लगा कि वो शायद ठीक से सो भी नहीं पाया है और कुछ परेशान भी है…फिर उसने धीरे धीरे अटक अटक कर बोलना शुरू किया- मैं कुछ दिन से बहुत……परेशान हूँ, ठीक से .. मैं धीरे-धीरे पूरे होश में आ गई और पूरे वाकये को सोचने लगी …15 मिनट में ही मेरे साथ यह क्या हो गया था….?? हिंदी XXX दिल धाड़ धाड़ बज रहा था…. यदि आपको यह बात…..मैं : हाँ बोलो ना… बोलते रहो, मैं सुन रही हूँ…..वो : आप यदि बुरा भी मान जाएँ तो आप मुझे मारिएगा.. मुझे कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया था… मेरे हाथ धीरे से उठे और उसके हाथों को पकड़ लिया…इतने में उसने मुझे वहीं सोफे पर गिरा दिया… मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ, बस अब लगने लगा था कि यह जो कुछ करना चाहता है वो जल्दी से कर ले… और चला जाये… वो मुझ पर छा गया… उसका एक हाथ फिर से मेरे बोबे पर आ गया, मेरी साँसे जोर जोर से चलने लगी..उसका दबाव मेरे वस्ति-क्षेत्र पर पड़ने लगा… मुझे अच्छा लगा… मैं खुद पर आश्चर्य करने लगी कि यह सब मुझे क्यों अच्छा लग रहा है..!! अब मैं सोचने लगी कि यदि अब कोई आकर दरवाजा खटखटाए तो हम दोनों को इस तरह अकेले देखकर क्या















