कहीं मेरी…” महक रुक गयी।“अरी पगली.. XXX Hindi मुझे मालूम नहीं था कि इस खेल में इतना मज़ा है… ससससससस…. नहीं. अरे रुकिए अंकल.. बोलो कहाँ छोडूं.. मैं आ रहा हूँ…” कहा और वह महक की जांघों के बीच आ गया। महक झट अपनी फांके उसके मुस्सल के लिए खोली। चूत के अंदर लालिमा लिए नमी को देखते ही धनेश आव देखा न ताव … योनि के मुहाने पर लंड ठिकाया और एक जोर का धक्का दिया…“Aammmmmaaaaaa….. पूरा लेलो अपने मुहं में…” कहते धनेश जोर लगा कर अपना पूरा लवड़ा उस अनचुदी लड़की के मुहं में घुसेड़ेने लगा। एक दो बार तो लंड महक की गले में अटक गयी थी।“आआअह्ह्ह्हह…. “वह कितना सॉफ्ट है तेरी यह मुनिया.. उफ्फ्फ…” महक अपना चूतड़ ऊपर उठाते बोली।“आअह्ह्ह्ह .. डॉक्टर ने बुलाया है क्या…?”“नहीं अंकल मैंने ही फ़ोन किया, वह क्या है की आप इतने दिन नहीं अये तो सोचा आपकी तबियत कैसी है” बस।“ताबियत तो ठीक है, बस एक डील आगया..बहुत बड़ा है… इसी लिए… “वैसे तबियत ठीक न होती तो क्या करती?” धनेश ने हँसते पुछा।“क्या करती कमसे कम तबियत पूछने तो आ जाती” महक ने भी हँसते जवाब दिया।“तुम मेरे यहाँ तो कभी भी आ सकती हो”.“वाह ऐसे थोड़े ही आ जाते, दावत दो तो आती हूँ…”“दावत का क्या चाहे तो आज ही देता हूँ …?”“ओह..















