सोचा जब आप नाश्ता कर रहे हो तो मैं भी नाश्ता कर लू. लेकिन इससे बड़ी चीज़ भी देखी. हिंदी XXX फफफ्फ़.बापू : आ. इस्पे आपका ही तो नाम लिखा है. मेरी हिप्स उमर के हिसाब से बड़ी हैं.मैं : बापू, आप मम्मी के कूल्हों (हिप्स) पर भी मालिश करते हो.बापू : हां. अब बताओ आपको मेरा जिस्म अच्छा लगा?बापू : हां. लेकिन कुच्छ देर बाद अच्छा लगेगा. बुज्ज्झा. मेरे बदन की मालिश तो बहुत करली. उस रात मैं सो नहीं सकी. बीच बीच में मेरे निपल्स को अपने दातों (टीत) से काट रहे थे. एक तो मेरा आँचल का साथ छुट गया था और अब इस गाओं के माहॉल में मेरा मन नहीं लग रहा था.लेकिन इंसान निराशा में भी कोई न कोई आशा की किरण ढून्ढ लेता है और इस घर में जहाँ केवल मा और बापू थे मुझे वह आशा की किरण बापू में दिखाई पड़ने लगी. मैं तो एग्ज़ाइट्मेंट से मरी जा रही थी. आपकी जीभ है बड़ी स्वाद.बापू : अच्छा.मैं : मेरी जीभ का स्वाद आपको कैसा लगा?बापू : ह्म.मैं : याद नहीं तो फिर चख (टेस्ट) कर देख लो.मैने बापू का फेस पकड़ कर अपनी तरफ लिया और अपनी जीभ बाहर निकल दी.















