चारे की पोटली उठाई और घर की तरफ़ चल दिए. हिंदी XXX आह आ… आह की सिसकारी तेजी से लिए जा रही थीं.एक दम से उठी, अपने ऊपर मुझे लेटा दिया, मेरे सारे कपड़े खोल दिए, और मेरे लिप्स से अपने लिप्स लगा दिए, हम दोनो लगतार होठों को चूमे जा रहे थे, में अपने हाथो से उन्हें नीचे सहला रहा था, आंटी पुरे आगोश में आ गई, मेरा मुंह अपने दुधु पर रख गया, आंटी के बूब्स 38 के है.यह आंटी ने खुद बाद में बताया, बिलकुल कसे हुए, इनको दबाने का मजा और चुसने का कल्पना से परे नही था, दोनो बूब्स को चूमता दबाता रहा साथ में निप्पल चूमता रहा, आंटी पुरी नंगी हो गई, पेट के पास आकर सहलाते हुए, नाभी में जीभ डाल दी उसे चूमने लगा. आह आह आह आह की आवाज़ निकलने लगी हम दोनों मदहोश हो गए, चदाई में, 10 मिनट से अधिक हो गए करते हुए, आंटी को पोजिशन चेंज का बोला, पहले तैयार नही हुई फिर हो गई, डॉगी स्टाइल में लेकर चोदता रहा.आंटी पूरा साथ देती रही, टाइम का पता नही रहा, 4 बजने को आए, हम दोनो का पानी छुट गया, पर जोश कम नही हुआ, आंटी मेने कपड़े पहने, आंटी कहने लगी आज तेरे प्यार ने लेट कर दीया बचे शहर से घर आ गए होंगे, और भेस को दूना हे,















