ऍम सॉरी प्लीज़ !!!वो – नही नही आपने कुछ गलत नही पूछा!मैं – तो इसने रोने वाली कोनसी बात है, बताइये?वो – वो दरअसल बात ये है के हम दोनों को इकठे रहने का समय बहुत कम मिलता है। क्या कहना महीने में दो तीन दिन इकठे सो जाये।मैं – ऐसा क्यों मैडम, आपकी ड्यूटी तो एक ही जगह की है। शाम को आपके पति घर आते ही होंगे।वो – हांजी घर भी आते है रोज़ाना, पर दिन के काम के थके खाना खाकर जल्दी से सो जाते है। यदि कई बार उनको सेक्स का बोलू भी तो कल को करने का वादा करके मेरी तरफ पीठ करके सो जाते है। मैं प्यासी ही सो जाती हूँ। गुस्सा भी बहुत आता है, पर घर का माहोल न बिगड़े इस लिए यही बात दिल में दबाकर सो जाती हूँ।मैं – ह्म्म्म… बात तो थोड़ी सीरीयस है। क्या इस मामले में मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ तो बताओ?वो – मदद तो कर सकते हो, पर मेरे उसूल मुझे इज़ाज़त नही देते।मैं – मतलब?वो – मतलब के मैं पतिव्रता स्त्री हूँ, मैं ये हरगिज़ नही चाहती के मेरी कोख में किसी और का बच्चा पले।मैं – मैं यह तो नही कह रहा के मुझसे सम्बन्ध बनाओ, पर बच्चे के लिए सेक्स तो करना पड़ेगा ना आखिर कब तक इस आग में जलती रहोगे।















