उठ जा, देख बहुत समय हो गया है”.“ऊँ ऊँ ऊँ… … … अभी मुझे और सोना है, पूरी रात तो पढाई करी है” वह सोते में ही कुनमुनाई.और अपने हाथ ऊपर की तरफ फैलाते हुए उसी पोजीशन में सीधी लेट गयी, उसका एक पैर का तलवा उसकी दूसरी जांघ से लगा हुआ बेड पर था कुल मिला कर उसके पैरों की पोजीशन कुछ ।> इस प्रकार थी। ये सब देख कर मेरे ऊपर तो बिजली ही गिर पडी।इस पोजीशन में उसकी अब हर चीज़ कपड़ों के ऊपर से भी क्लियर नज़र आ रही थी। उसके केले के पेड़ के तने जैसी चिकनी और दूधिया जांघे देख कर मेरा लंड गनगना उठा। अब मुझे कंट्रोल करना असंभव लग रहा था। मैंने धीरे से उसकी स्कर्ट बिलकुल बिल्कुल उठा कर उसके पेट पर रख दी।अब उसकी पाव रोटी की तरह फूली हुयी चूत पूरी तौर से मेरी नज़रों के सामने थी। मै उसकी चूत को चूमने के लिए नीचे झुका तो मेरी निगाह दोनों फांकों के बीच के बड़े से धब्बे पर टिक गयी जो शायद उसके चूतरस से बना था। मैंने उसी धब्बे के ऊपर दोनों फांकों के बीच अपनी नाक घुसा गहरी सी सांस लेकर देखा तो चूतरस की मस्त खुशबू से मेरा लंड उसकी चूत में जाने को बेताब होकर फनफनाने लगा।मेरी इच्छा उसकी चड्डी को एक साइड करके उसकी चूत















