वह मेरे ऊपर चढ़ गया और अपने होठ मेरे होठों पर गड़ा दिए… अमृत का स्वाद था उसके लाल सुर्ख होंठो में…मेरे उरोज उसकी नोच खसोट से दुगने साइज के हो रहे थे… मैंने उसकी शर्ट खोल दी और जब मेरी नंगी छाती उसकी छाती से टकराई तो मारे संतुष्टि के मेरे आँखों में पानी आ गया… उसका लिंग मेरी योनि द्वार के लिए छटपटा रहा था… धीरज शायद चूत में एंट्री ले कर हर दम के किये मुझे आपने बना लेना चाहता था.. धीरज में तो जैसे साक्षात काम-देव का वास हो गया था…उसने आगे घिसकाते हुए आपने लिंग को मेरे कूल्हों की फांक पर टिका दिया… उसका लिंग रह रह कर फुफकार मार रहा था.. XXX Hindi हम दोनों खूब बाते करती और धीरज टीवी देखता रहता. और उसके हाथों को अपने जिस्म पर रेंगने की इजाजत दे दी..धीरज मेरे वक्ष स्थल को बुरी तरह नोच रहा था.. जब मैं शिफ्ट हो गयी तो मुझे बहुत खुशी हुई. लूट ले अपनी चाची की जवानी….!” और उसका लिंग मेरे योनि को छेड़ता रहा… जब तक की हम दोनों एक साथ स्खलित नहीं हो गए… यह मेरे जीवन का पहला चरमोत्कर्ष था.. एक दिन वह आया तो बहुत उदास था. हम दोनों खूब बाते करती और धीरज टीवी देखता रहता.















