गाँव की देसी गर्म चुदाई

मेरा नाम वाणी है, अपनी गाण्ड में लौड़े लेना मेरी सबसे बड़ी खुशी है! XXX Hindi उसकी दो-दो अंगुलियाँ एक साथ मेरी चूत में अन्दर सरक गई थी! यहाँ कैसे आ गये?”“ओह! रोज चोद दिया कर, मेरी गाण्ड को तो तूने मस्त कर दिया।”वो मुझसे लिपट कर सो गया। मैं फिर सो गई। सुबह उठे तो देखा आठ बज रहे थे। मैं जल्दी से उठने लग़ी। तभी मोहक ने मुझे फिर से दबोच लिया।“यह क्या कर रहे हो, अब तो चोदते ही रहना, चाय नाश्ता तो बना लें!”“सुबह सुबह चुदने से अच्छा शगुन होता है, चुदा लो!”“अच्छा किसने कहा है ऐसा?”“… उह … मैंने कहा है ऐसा!”मैं खिलखिलाती हुई उस पर गिर पड़ी।“साला खुद ही कहता है और फिर खुद चोद भी देता है!”“तो और कौन चोदेगा फिर?”कह कर उसने मुझे अपने नीचे दबा लिया। मैं खिलखिला कर उसे गुदगुदी करने लगी। उसका लण्ड बेहद तन्नाया हुआ था। लग रहा था कि चोदे बिना वो नहीं मानने वाला है। पर सच भी तो है कि मुझे उसके लण्ड का मजा अपनी चूत में मिला ही कहाँ था। सो मैंने अपनी टांगें धीरे से मुस्कराते हुए ऊपर उठा ली।वो मेरे ऊपर छाने लगा, मैं उसके नीचे उसके सुहाने से दबाव में दबती चली गई। फ़ूल सा उसका बदन लग रहा था। उसके होंठ मेरे होंठो से मिल गये। मेरी दोनों चूचियाँ उसके कठोर हाथों से

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