गाँव की देहाती जोड़ी का गर्मागरम घरेलू मज़ा

वो कहने लगा और मेरी डिग्रियां देखने लगा। वो बड़ा हसमुख यह। मैंने सोचने लगी बड़ा भला मानस है। कितना मिलनसार है। ये आदमी मुझसे पहले क्यों नही टकराया। गुड्डू ने मेरी सारी डिग्रियां देख ली।काम हो जाएगा ! वो हँसकर बोला।मैंने बर्दास्त कर लिया। गुड्डू अब मुझपर झुक गया। मेरे गले, ठोड़ी, गालों को चूमने चाटने लगा। उसका एक हाथ मेरी पीठ पर और दूसरा हाथ मेरी जांघ पर था। अब तक मैं नँगी नहीं हुई थी, अभी तक मैं कपड़ों में थी। लगता है ये कमीना आज मुझको जमकर चोदेगा। मैंने मन ही मन सोचा।गौतमी बेबी! XXX Hindi वो हँसकर बोला.जितने हसींन मेरे मुँह के गुलाबी होंठ थे, उतने ही हसींन मेरी चूत के होंठ थे। गुड्डू ने अब मेरे दोनों पैर खोल दिए। अब उसको मेरी बुर साफ साफ दिख रही थी। वो चाटने लगा। मैं कसक गयी। उसकी नाक मेरी लम्बी लम्बी छल्लेदार झांटों को कहीं छिप गयी। मैंने उसको नही रोका।सायद कहीं ना कहीं मैं भी चुदवाना चाहती थी। वो मेरी बुर पीने लगा। मेरा हाथ उसके सर पर चला गया। मैं भी मचल मचलके उसके सिर पर हाथ फेरने लगी। गुड्डू बहुत बड़ा वाला बुर चटऊवल निकल गया दोंस्तों।मेरी बुर छोड़ने का नाम ही नही ले रहा था। चाटे जा रहा था, बस चाटे ही जा रहा था। मेरी बुर अब बेहने लगी थी। जैसे कढ़ाई में मक्खन

गाँव की देहाती जोड़ी का गर्मागरम घरेलू मज़ा

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