गांव की गर्म फिल्मों का इतिहास

मेरे पति का तो नही है।चाची का चेहरा लाल था वो अम्मा को चुप रहने का इशारा करती है। पर अम्मा उसे टोकती है: बोल न, जो है वो है।चाची धीमे से नही बोलती है। अम्मा हस्ते हुए लण्ड को ऊपर से नीचे हिलाना चालू करती है। मुझे मजा बहोत आ रहा था पर दर्द भी उतना ही था। अम्मा लन्ड को हिलाते हिलाते मेरे शरीर का जायजा लेने लगी। मेरे छाती बाजुओं पे हाथ घूमाने लगी। मैं भी उनके चुचो को घूरने लगा। उनका पल्लू चुचो से हटा हुआ था।उनकी नजर जब मेरे आंखों के दिशा में गयी तो उन्होंने भी मेरी नजर की हवस नोटिस कर ली। मुझे मालूम पड़ा की अम्मा में मेरी नजर ताड ली तो मैने भी नजर हटा दी और इधर उधर देखने लगा। पर मुझे नजर चुराते देख अम्मा ने लण्ड को हल्का सा दबाया। मेरे मुह से सिसकी/चींख निकलने ही वाली थी की अम्मा ने मेरे मुह पे हाथ रखा जिससे मेरी आवाज चाची तक न जाए।अम्मा ने आंखों से कहा: “चुचे चाहिए क्या?”मैंने भी शैतानी मुस्कराहट में हा बोल दिया। वो भी मादक हस दी। उसने ब्लाउज खोल दिया। ब्रा तो वो पहनती नही। अभी गोल मटोल लटके हुए चुचे मेरे सामने थे। मैंने हल्के से हाथ बढ़ाये और उनके चुचे सहलाने लगा। हाथ घुमाते घुमाते उनके निप्पल को मसल दिया तो अम्मा

गांव की गर्म फिल्मों का इतिहास

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