गांव की गलियों में छुपी हुई वो गर्म कहानी, जो तेरे बदन की आग से जल उठे

गलती तो मेरी थी। मैंने ही तो उसका लण्ड हिला हिला कर उसका वीर्य निकाला था। मुझे बड़ा पछतावा हुआ। पर औरत मानिनी होती है।मैं भी अपनी गलती आसानी से स्वीकार नहीं करती। पर मेरा मन संजय के लिए मसोस रहा था। खैर मैंने उससे ट्रैन में सफर के दरम्यान भी बात नहीं की। मैं अपने स्टेशन पर उतर गयी तब मेरे पास संजय का मैसेज आया। “प्रिया प्लीज मुझे माफ़ कर दो। गलती हो गयी। आगे से ऐसी गलती नहीं करूंगा।”मैं बरबस हँस पड़ी। मैंने उसे मैसेज किया, “ठीक है। जाओ माफ़ किया। पर तुम्हें सजा मिलेगी। शाम को मेरे ऑफिस के सामने मेरा इंतजार करना। मैं आकर तुम्हें सजा सुनाऊँगी।”जाहिर था मेरा मैसेज पढ़ कर संजय उछल पड़ा होगा। उसने जवाब दिया, “आपकी हर कोई सजा सर आँखों पर।”मैं सोचने लगी, किस मिट्टी से बना है यह आदमी? XXX Hindi कभी सोचा तुमने?” तब मेरे पति ने मेरी और सहमे हुए देखा और उसके मन की बात उसके मुंह से निकल ही पड़ी।वह बोला, “मुझे क्या पता तुम भी किसी से चुदवा नहीं रही हो? उसकी गलती ना होने पर मेरे इतने डाँटने के बाद भी वह माफ़ी माँग रहा था? कभी सोचा तुमने?” तब मेरे पति ने मेरी और सहमे हुए देखा और उसके मन की बात उसके मुंह से निकल ही पड़ी।वह बोला, “मुझे क्या पता तुम भी किसी से

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