पर.. XXX Hindi धन्यवाद. मै एक सेक्सी किताब की कहानी पढ़कर अपने लौड़े को मुठिया रहा था। इसे मैने स्टेशन के बाहर एक फुटपाथ से खरीदा था। किताब की कीमत थी 50 रूपये। लेकिन जो मजा मिल रहा था उसकी कीमत का कोई मूल्य नहीं था। इस किताब को पढ़ कर मै पचासों बार अपना लौड़ा झाड़ चुका था और हर बार उतनी ही लज्जत और मस्ती का अहसास होता था जैसे पहली बार पढ़ने पर हुआ था। Sweet Girl Virgin Sexकहानी में एक ऐसे ठर्की बूढ़े का जिक्र था जिसे घर बैठे-बैठे ही एक कुँवारी चूत मिल जाती है ! बहुत बदबू करेगा…”“कोई बात नहीं तेरी बदबू मेरे लिए खुशबू है…आ जा…”फिर वो सकुचाती हुई मेरे पास तक आई।“कैसे करू मेरी समझ में नहीं आ रहा….”“अरे अपना एक पैर मेरी गर्दन के इधर रख और दूसरा उधर… फिर धीरे से अपनी कच्छी सरका कर बैठ जा..”सकुचाती हुई शरमाते हुए उसने वही किया। अब मेरा सिर उसकी स्कर्ट के ठीक नीचे था। मै नीचे से उसकी लाल रंग की कच्छी देख रहा था। जहाँ पर उसकी बुर थी वहाँ पर काफी ऊभार था। मतलब उसने पैड लगाया हुआ था। वह खड़ी होकर अपने स्कर्ट को इस तरह दबाने लगी ताकि मै उसकी बुर न देख पाँऊ।“ऐसे ढकेगी तो अपना मूत कैसे पिलायेगी… चल जल्दी से कच्छी सरका कर मेरे मुँह में मूत…”इतना कहकर मैने















