तो उन्होंने किसी वजह से इंकार कर दिया। फेर भी मैंने आस नही छोड़ी।हर रोज़ साइकिल पे दूध का पता करने निकल जाता। काफी दिनों बाद घर से डेढ़ किलोमोटर दूर एक जगह पे दूध मिलने की किसी ने बात बताई। मैं अगले दिन ही बताई जगह पे साइकिल लेकर चला गया। वो जगह खेतो में थी।मतलब के वो किसान अपना गांव वाला घर छोड़ के खेत में आके रहने लगा था। मैंने वहां जाकर देखा तो लोहे का बड़ा सा गेट था जो के अंदर से बन्द था. हिंदी XXX ये हिन्दी सेक्सी कहानी कुछ साल पुरानी है जब मेने पढ़ाई खत्म करके काम ढूँढना शुरु किया. मैंने साइकिल को स्टैंड पे लगाके गेट को हाथ से खटकाया तो एक बज़ुर्ग सी औरत ने दरवाजा खोला।मैं – नमस्ते आंटी जीऔरत — नमस्ते , हांजी आप कौन हो और किन से मिलना है आपको?मैं — आंटी जी गांव से आया हूँ, मेरी दुकान है, आपके घर में दुकान पे बेचने के लिए दूध का पता करने आया हूँ।औरत – आओ अंदर आ आजो।मैं साइकिल को लॉक करके अंदर चला गया। अंदर जाकर आंटी ने मुझे कुर्सी की तरफ इशारा करके बैठने को बोला और खुद दुसरे कमरे में चली गयी। करीब 5 मिनट बाद एक मोटा सा आदमी जो शयद उसका पति था, आया.और उनसे दूध का रेट तय करके अगले दिन से ही















