इस तरह से जन्मेजय को देखने कीनजर ही बदल गयी। मै उसे अब चुदासी नजरो से देख रही थी। फिर भी उसे कुछ पता नहीं चल पा रहा था।वो हर रात सिर्फ अंडरवियर में ही सोता था। उसका कमरा मेरे कमरे के जस्ट सामने ही था। पतिदेव कमा कर पैसा भेजते थे। जन्मेजय घर पर ही काम लगवाकर घर की साफ़ सफाई कराने के लिए ही रुका हुआ था। वो एक दिन सुबह सुबह सो कर उठा। मैं भी अपने बेड पर लाइट बुझा के बैठी थी।मेरे कमरे में दिन में भी अँधेरा सा रहता है। वो अपने कमरे से निकला। मै अपनी आँख उसी पर गड़ाए हुए उसे देख रही थी। वो अपना लंड खुजाते हुए वही खड़ा हो गया। चूकि उसे पता नहीं चल पा रहा था की अपने कमरे में बैठी हूँ। उसने अचानक से अपना अंडरवियर नीचे सरकाया।उसके बाद उसके अंदर से लगभग 7 इंच का मोटा लंड खूब टाइट होकर निकला। मेरे तो मुह में पानी आ गया। जी करता था कि अभी जाकर उसके लंड को काट काट कर खा लूं। फिर मैंने उसके लंड निकालने के राज को जानने के लिए चुपचाप सब देखती रही।वो अपना लंड निकाल कर मुठियाने लगा। उसकी नसे फूलने लगी। उसके औजार ने बारिश की तरह अपना सारा माल निकाल दिया। उसके बाद वो ब्रश करने चला गया। मैं तो हैरान रह गयी। सारा नजारा देखकर मेरी आँखे फ़टी की फटी रह गयी। मै तो उसे बहुत ही















