जैसे ही वो अन्दर घुसे.. हिंदी XXX धीरे-धीरे प्रकाश..’‘बस बस जूही.. उनके होंठों को चूसने लगे, अब वो भी अंकल का साथ दे रही थीं।मेरे लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था। प्रकाश अंकल ने उठकर माँ के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। माँ अपना पाँव हटाने लगीं। वह दोनों किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक-दूसरे से खेल रहे थे, उनके अन्दर कोई जल्दबाजी नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे।प्रकाश अंकल उनकी पायल को चूमने लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करने लगे। प्रकाश अंकल धीरे से माँ की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी। उनका लण्ड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था। अंकल पूरे नंगे हुए और माँ की टांगें ऊपर करके अपना सात इंच का लण्ड माँ की फूली हुई चूत में डाल दिया।माँ सिसकार उठीं- अअह आआ.. इस बात को समझ सकती हो।’मैंने बिना कोई जवाब दिए अपना सिर शर्म से नीचे झुका लिया था।‘वैसे कितने साल की हो गई हो तुम?’‘पिछले महीने में 18 साल की..’ मैंने धीरे से शरमाते हुए जवाब दिया था।अंकल ने मुझे अपने सीने से लगा लिया- बड़ी हो गई है मेरी बच्ची..















