तो बोला हां आपकी याद आ रही थी, वो अंदर आ गया, और मुझे अपनी बाहों में भर लिया.मैंने अपना पेंटी खोल दी और पलंग पे लेट गयी, वो भी ऊपर चढ़ के नाईटी को ऊपर कर दिया और मेरे बूब्स को पिने लगा मेरा बूब भी बड़ा बड़ा था, वो एक हाथ से दबा रहा था एक हाथ से मेरे चूत में ऊँगली दाल दिया और फिर दांत से मेरे चूच के निप्पल को हलके हलके काट रहा था, उसकी ये अदा मुझे भा गई. हिंदी XXX “Bhabhi Vasna Sukh”आज तक मुझे ऐसा फिल नहीं हुआ था, फिर वो ऊँगली घुसा घुसा के मेरे चूत से पानी निकाल दिया, मैं आह आअह के अलावा और कुछ भी नहीं कह रही थी. थोड़े दिन बाद मैं वह से खली कर के कोई और मकान में आ गयी, दो तीन दिन बाद ही विवेक मुझसे अकेले ही मिलने आ गया, सुबह के दस बज रहे थे. अब वो मेरे यहाँ रोज आ जाता था और चोद के मुझे जात्ता था, अब मुझे विवेक भी अच्छा नहीं लगने लगा, हद तो तब हो गयी जब मैं एक दिन कबाड़ी बाले से चुद गयी, उसके बाद फिर मैं अपने मकान मालिक से.फिर मैं अख़बार बाले से, मुझे अब हरेक दस दिन में मर्द बदलना काफी अच्छा लगने लगा था, और मैं इस तरह से चुदने लगी थी,















