सोच लो… इटस ए लाइफटाइम चांस… नाश्ते से अधिक उसकी प्लेट मजेदार… नहीं बताऊँगी…. XXX Hindi फिर गंभीरता…..हे भगवान, धरती फट जाए, मैं समा जाऊँ।“यह देखो”, छवि ने उसे छिलका दिखाया, “टूटकर अन्दर रह गया है।”“यह तो सीरियस है।” अरुण सोचता हुआ बोला।“बहुत कोशिश की, नहीं निकल रहा। तुम कुछ उपाय कर सकते हो?”अरुण विचारमग्न था। बोला, “देखना पड़ेगा।”मैंने स्वाचालित-सा पैरों को आपस में दबा लिया।“माधुरी….”मैं कुछ नहीं सुन पा रही थी, कुछ नहीं समझ पा रही थी। कानों में यंत्रवत आवाज आ रही थी, “माधुरी… बी ब्रेव…! भगवान ने जो खूबियाँ दी हैं उनको नकारते रहना क्या इसका सही मान है? ओ माँ !“माधुरी”, इस बार छवि का स्वर कठोर है,”बोलो…..”क्या बोलूँ मैं। मेरी जुबान नहीं खुलती।“खुद करोगी या मुझे करना पड़ेगा?”वह मेरा हाथ खींचकर वहाँ पर लगा देती है,”करो।”मेरा हाथ पड़ा रहता है।“डू इट यार !”मैं कोई हरकत नहीं करती, मर जाना बेहतर है।“लेट अस डू इट फॉर हर (चलो हम इसका करते हैं)।”मैं हल्के से बाँह उठाकर पलकों को झिरी से देखती हूँ। अरुण सकुचाता हुआ खड़ा है। बस मेरे उस स्थल को देख रहा है।छवि की हँसी,”सुंदर है ना?”शर्म की एक लहर आग-सी जलाती मेरे ऊपर से नीचे निकल जाती है, बेशर्म लड़की…!“क्या सोच रहे हो?”अरुण दुविधा में है, इजाजत के बगैर किसी लड़की का जननांग छूना !















