सो वो भी अब खामोश हो गया। रात काफी हो चुकी थी, अँधेरा पूरी तरह था हर चीज़ काली परछाई की तरह दिख रही थी। कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि अमृता मेरे बगल में आकर लेट गई है। गौर किया तो अनूप भी उसके बगल में लेटा हुआ था।मुझे लगा अब सब सोने जा रहे हैं सो मैं भी सोने का प्रयास करने लगी। तभी मुझे कुछ फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी। उस फुसफुसाहट से मनीष भी करवट लेने लगा तो फुसफुसाहट बंद हो गई। कुछ देर के बाद मुझे फिर से फुसफुसाने की आवाज आई।यह आवाज अमृता की थी, वो कह रही थी- नहीं.. XXX Hindi कोई इतना निडर नहीं होता।उसने तब कहा- ठीक है सुबह अमृता से पूछ लेना, अनूप ने अमृता को दो बार चोदा।मैं समझ गई कि मनीष भी उन्हें देख रहा था, पर मैं उसके सामने अनजान बनी रही। फिर मैं खामोश हो गई और मेरा इस तरह का व्यवहार देख मनीष भी खामोश हो गया। मैं अमृता और मनीष का खेल देख कर उत्तेजित हो गई थी। फिर मैंने सोचा कि जब मैं उत्तेजित हो गई थी, तो मनीष भी हुआ होगा। यही सोचते हुए मैं सोने की कोशिश करने लगी, पर नींद नहीं आ रही थी।कुछ देर तक तो मैं खामोश रही फिर पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने मनीष से पूछा- तुमने क्या-क्या देखा?उसने















