तुझे मेरी कसम है। कुछ उल्टा सीधा मत करना..” सुधा ने कहा।“बहुत देर हो चुकी माँ… बहुत देर हो चुकी…”“कोई देर नहीं हुई सिद्धू। मेरी बात सुन…” सुधा ने समझने की कोशिश की।“आप मेरी बात सुनो माँ…” सिद्धू ने बात बीच में ही काट दी- “क्या चाहती हो आप… मैं तो दोनों तरफ से पिस रहा हूँ ना… अगर मैं सब भूलकर फिर आपके साथ माँ बेटे का रिश्ता बना हूँ तो सारी जिंदगी अपने आपसे आँख नहीं मिला पाऊँगा की मैंने अपनी माँ के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाया था। दूसरी तरफ से मैं अगर ये सोचें की। मैं कितना चाहता हूँ आपको, कितना तरसता हूँ आपके लिए, एक बेटे की तरह नहीं पर एक मर्द की तरह तो भी नुकसान मेरा ही है क्योंकी आपका कहना है की हम एक नहीं हो सकते…”“तूं अच्छी तरह जानता है की हम क्यों एक नहीं हो सकते। समझाया था मैंने तुझे उस दिन…” सुधा लगभग चिल्लाती हुई बोली।“क्या सिर्फ वही एक वजह है..” सिद्धू ने पूछा।“तू मेरा बेटा है और मैं तेरी माँ। इससे बड़ी वजह और क्या हो सकती है..” सुधा इस बार चिल्ला ही पड़ी- “पाप है ये। घोर पाप..”“तो ठीक है माँ। फिर एक पाप और कर लेने दो मुझे। इस तरह से जिंदा नहीं रह सकता मैं। बस अब बर्दाश्त नहीं होता…”“सिद्धू सुन… कुछ उल्टा सीधा नहीं करना। मेरी कसम















