विशम्भर सिंह के हाथ मेरे पीठ को नापने लगे. हिंदी XXX मैं कुछ नही कर सकी. कौन सा मेरी चूत घट जाएगी या कम हो जाएगी. पर वो कोई बात नही सुन रहा था. आज तक सिर्फ मेरे मर्द शम्भू ने ही मेरी चूत पी थी. शर्मीला बुआ , वो शम्भू चाचा को प्रधान अपने कोठी पर उठा ले गया. मैं रोने लगी. फिर वो मुझे चोदने लगा. उपर से हमारे गांव में जिन जिन लोगों ने अपनी जमीन बेच दी थी वो धीरे धीरे बैंक में जमा पैसा खा गए थे और कुछ ही सालों में ठनठन गोपाल बन गए थे.इसलिए मैं और मेरे पति पूरी तरह से जमीन उस शोपिंग माल बनाने वाली कंपनी के खिलाफ थे. फिर विशम्भर सिंह ने मारे द्वेष और इर्षा के मेरे पति पर चोरी का झूठा आरोप लगा दिया और उनको जेल में बंद करवा दिया. आज मुझे उसने उपर से नीचे तक घूर के देखा.अरी ओ शर्मीला!! हम वो जमीन नही बेचेंगे! अब कल १२ बजे तक इसका मर्द छूट जाएगा’ वो लोग बोले. मैंने कहा और बैठने के लिए उनको खाट दी.हमारा ये प्रधान उपर से तो खुद को हमारा रक्षक दिखाता था, पर था बहुत हरामी पीस. मेरी पीठ पर उसके हाथ ही लहरा रहें थे.















