वरना और भी है। चाहो तो और दूध का इंतेजाम कर देती हूँ…”मैंने बोला- “नहीं भाभी, मेरा पेट बिल्कुल भर गया है…”अभी भी मैं रसीला की चूची चूस रहा था, तो रसीला भाभी से बोली- “जूही, लगता है ये मेरे चूचे ऐसे नहीं छोड़ेगा, तुम इसे मेरे घर लेकर आना, इसको पूरा भोजन और चोदन करा दूँगी…”जूही भाभी हँसकर बोली- हाँ वो ठीक रहेगा, लेकिन अभी तो हमारा मेहमान है।फिर मैं दूध पीते-पीते रसीला के पेटीकोट के नारे पे अपना हाथ ले जाने लगा, जिसे देखकर रसीला बोली- “अभी नहीं, घर आना आराम से करेंगे…”मैंने बोला- सिर्फ एक बार मुझे तुम्हारी वो देखनी है।रसीला बोली- वो मतलब?मैं- मतलब आपकी चूत।रसीला- “देखकर भी क्या करोगे? हिंदी XXX भैया भी अभी खेत में दूर हैं, और वैसे भी वो मुझे छोटा ही समझ रहे हैं, अगर चोदते वक्त आ भी गये तो उन्हें मुझ पर शक नहीं होगा। हम गेट बंद करके सोएंगे…”मनीषा भाभी खुश होकर बोली- “ठीक है, मैं गेट बंद करके आती हूँ…”फिर वो जैसे ही गेट बंद करके आई, मैंने उसको बाहों में ले लिया, उनकी साड़ी का पल्लू पकड़कर साइड में कर दिया, भाभी ने पीले कलर का ब्लाउज़ पहना था। मैंने उसके चूचे दबोच लिए।मनीषा बोली- आआआहहह्र…“धीरे देवरजी, मै भागी नहीं जा रही हूँ, इधर ही रहूंगी…”मैंने उसके चूचों के बीच में मेरा मुँह घुसा दिया और उसकी महक लेने लगा,















