आयशा ने मंद मंद मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा- दूध का स्वाद बहुत भाया है न!तब मैंने हां कहते हुए उसके अमृतकलशों से स्तनपान करने की मेरी इच्छा फिर से जताई.तो आयशा ने अपना सूट एक तरफ से ऊपर करके कहा- लो कर लो अपनी इच्छा पूरी.एक सेकंड के लिए तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था. हिंदी XXX मेरे ऐसे करने पर आयशा की आंखों से आंसू आ जाते थे. मैं भी अपनी शॉर्टस को ऊपर करके अपने घर पर आ गया. आयशा के मुँह से ये निकला तो मेरे लंड ने एक बार जोर से फनफना कर दिखा दिया. ऐसे दो तीन दिन चले गए. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.अब मैं कहां रुकने वाला था. नमस्कार दोस्तो, मैं सलमान आप सभी का धन्यवाद करता हूँ, जो आप मेरी कहानियों को इतना प्यार बख्शते हो, मुझे ईमेल करते रहते हो। दोस्तो, यह कहानी मेरे एक पाठक की है| जी उसने अपनी जुबानी मुझे बताई है, तो मैं आपको उसी के शब्दों में पेश कर रहा हूँ। हैलो फ्रेंड्स, मैं संजीव कुमार आपको अपनी कॉलेज फ्रेंड की सेक्स कहानी सुना रहा हूँ. थोड़ी देर बाद आयशा अपने मादक शरीर पर टॉवेल लपेटकर हॉल में कुछ ढूंढने आयी, शायद वो उसकी पेंटी ढूंढ रही थी, जिस पर मैं खुद बैठा था.तभी अचानक से वो बाजू की अलमारी से दूसरी पेंटी















