मेरे नीचे बेशक शोभा थी पर मेरे जेहन में नीलम और थी वो हर पल जब कैसे उसे दो मर्द चोद रहे थे, मेरे हर धक्के पर शोभा हुमच हुमच कर साथ दे रही थी मेरी जीभ उसके मुह के हर कोने में रेंग रही थी उत्तेजना सर चढ़ के बोल रही थी.की शोभा ने अपनी टांगो को मेरी कमर पर लपेट लिया और जैसे उसकी चूत में तूफ़ान आ गया हो, चिकनाई बहुत बढ़ गयी थी कुछ पल शोभा किसी जोंक की तरह मुझसे चिपक गयी और फिर ढीली पड़ गयी शोभा ने पैरो को अब x की तरह कर लिया और मेरा लण्ड इस दवाब को सह नहीं पाया मेरे बदन में जैसे अंगारे भर गए थे और एक के बाद एक मेरे वीर्य की पिचकारियां उसकी चूत में गिरने लगी मैं झड़ कर उसके ऊपर ही गिर गया.अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.तो मैंने कपडे उतारे और गीली मिट्टी बदन पर लपेट ली ताकि अगर ये काटे तो बचाव हो मैंने जुगाड़ तो सही किया था अपने तरीक़े से,तो गया छत्ते के पास और तोड़ने लगा पर मधुमक्खियां गुस्सा हो गयी और एक के बाद एक काटने लगी मुझे.बड़ी मधुमक्खियां जहा जहा काटे वहाँ तेज दर्द हो और लाल लाल निशान से हो जाए,पर आँखों को सामने शहद















