अब आगे- Papa Meri Chut Chodoबाहर बारिश बहुत तेज हो गई और मैं उठ कर बाहर आ गई। पापा भी मेरे पीछे बाहर आ गए। जैसे ही पापा बाहर आए मैं उनसे कस खर लिपट गई। मेरे मोटे-मोटे बूब्ज़ पापा कई सुडौल छाती में गढ़ गए, मेरा नाजुक एवं मुलायम पेट पापा के सख्त पेट से चिपक गया और पापा का लंड मेरी चूत से टकराने लगा।हम पर शराब, चर्स एवं सेक्स का नशा पूरी तरह चढ़ गया था ऊपर से बारिश का पानी और आग लगा रहा था। मैं पापा की पीठ सहलाती हुई उनकी गर्दन के नीचे चूमने लगी और पापा मेरे दोनों चूतडो़ं को पकड़कर दबाने लगे।बीच-बीच में मैं पापा की की छाती पर अपने बूब्ज़ मसल देती। पापा ने मेरा सिर पकड़ा और मेरा चेहरा ऊपर करके अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए। पहले हमने एक दूसरे के बारिश से भीगे होंठ जीभ से चाटकर साफ किए और फिर होंठों का रसपान करने लगे।कुछ टाईम तो आराम से चूमते रहे फिर जोर जोर से चूसने लगे। हम एक दूसरे के होंठों को मुंह में लेकर चूसने लगे और दांतों से हल्का हल्का काटने लगे। फिर हम एक दूसरे के मुंह में जीभ डालकर घुमाने एवं चूसने लगे।मैं पापा के बारिश से गीले हुए गाल, कान और गर्दन चूसते हुए पापा कई छाती को जीभ से चाटने लगी।















