और यहाँ आपकी जागेह कितनी मुलायम है “और मैने अपने दाँतों से वहाँ उनकी आर्मपिट पर हल्के से काट लिया…”मन तो किया के पूरे का पूरा खा जाऊं…“अरे… वहाँ गंदा है नंदू… ठीक है अगर तुम्हें इतना ही पसंद है.. हिंदी XXX मुझ से अलग होने का दर्द और तड़प भरा था उस आलिंगन में..और दूसरी बार सुरीली धुन गुनगुनाते हुए मुझे अपनी छाती से चिपकाना.. उनके कंधों को थामे उनका चेहरा अपने सामने कर लिया… और टूट पड़ा उनके गालों पर.. उनके भरे भरे गोलाकार मुलायम स्तनों का दबाब मेरे सीने पर…इसके पहले आज तक मेरा ध्यान इस तरह के आनंद पर कभी नहीं गायक़ था.. उनकी आर्मपिट अब और भी खूल गये थे.मैने आर्मपिट चाट ते हुए पूछा, “पर दीदी.. पर भोले राजा कमरा तो कम से कम बंद कर लिया होता…” और फिर से हँसने लगीं. पर उस वक़्त मुझे दीदी कुछ और भी लग रही थी…“अरे ऐसे टकटकी लगाए क्या देख रहा है… पहले कभी देखा नहीं है क्या..”मैने मन ही मन में कहा “देखा तो है पर इस नज़र से नहीं..”पर दीदी से कहा “नहीं दीदी.. उनके शरीर की गर्मी, उनके मुलायम स्तनों का मेरे सीने पर दाबना… अभी तक मैं उन्हें अपनी शरीर में अनुभव कर रहा था…मैं आँखें बंद किए उस मस्ती भरे आलम का मज़ा ले रहा था… थोड़ी देर बाद आँखें खोली.देखा तो दीदी अपने















