हूँ…हमममम अहह्ह्ह्हह…अई… अई….अई…” की चीख के साथ चुदवा रही थी। पंकज मेरी उछलती हुई चूंचियो को पकड़ कर मेरी चूंचिया दबाने लगे। दोनो तो आराम कर कर के चोद रहे थे।मै तो अकेली ही दोनों के मोटे लौंडे को खा रही थी। रंजीत बैठ गया। मै कुतिया बन कर उसका लौड़ा चूसने लगी। मैंने उसके लौड़े पर लगे माल को चाट कर साफ़ किया। मुझे झुका देख पंकज झट से बिस्तर पर चढ़ कर मेरी चूत के पीछे घुटने मोड़कर बैठ गया। उसने अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया।मेरी कमर को पकड़ कर उसने लपालप अपना लौंडा मेरी चूत में डालने लगा। उसका लौड़ा बड़ी ही तेजी से मेरी चूत को फाड़ रहा था। मेरी चूत से पानी बहने लगा। उसने अपना लौड़ा निकाल कर मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया। उसने मेरी चूत के माल को पी लिया।रंजीत ने मुझे अपने लौड़े पर बिठा लिया। उसने अपना लौड़ा मेरी गांड़ में घुसाने लगा। उसका बड़ा लौड़ा मेरी गांड़ में आसानी से नहीं घुस रहा था। उसने अपने मुह से थोड़ा सा थूक निकाला। उसे अपने लौड़े के टोपे पर लगा लिया। अबकी बार उसने धक्का मारा। उसके लौड़े का टोपा मेरी गांड में घुस गया।मै इस बार कुछ ज्यादा ही तङप उठी। मेरी गांड़ फट गई। मै खूब तेज से “आ आ आ अह्हह्हह.















