मुझे देखकर उसने हाथ हटा लिए। मैं चड्डी उतारकर फिर से शोभा के ऊपर था.स्तनों को चूस चूस कर लाल कर दिया मैंने, फिर सहलाते हुए नीचे को आ रहा था, एक हाथ स्तन पर दूसरा नाभि के पास सहला रहा था, होंठ ऊपर से नीचे चुम्बन का काम कर रहे थे। धीरे धीरे चेहरे को चूत के सामने ले आया कमर पर हाथ फिराते हुए पेंटी पर ले गया। पेंटी चूत के स्थान पर फूली थी और नीचे की ओर बुरी तरह से चूत रस से भीग गई थी। मैंने पेंटी को नीचे खिसकाना चाही तो शोभा ने टांगें आपस में भींच ली।मैंने कहा- सिर्फ चूमना है! XXX Hindi एक दिन यही बताने को मैंने तुम्हें फोन किया था, फिर सोचा कि तुम व्यस्त न हो, इसलिए कट कर दिया था, तुम बहुत अच्छे दोस्त हो, कभी फोन लगाऊँ तो मुझसे बात करोगे या नहीं?मैंने कहा- शोभा जी, उस रात को मैं एक सुन्दर सपने की तरह मानता हूँ, जो रात गई तो बात गई, मेरी तरफ से तुम निश्चिंत रहना।तब तक मिस्त्री का काम हो गया था, मिस्त्री से मैंने कहा- तुम गाड़ी को गेट से बाहर निकालो, मैं मैडम को बाथरूम दिखाकर आता हूँ।मिस्त्री चाभी लेकर बाहर चला गया, मैं शोभा को लेकर बाथरूम मैं गया और पूछा- कैसा लगा?बोली- कल्पना से भी ज्यादा सुन्दर!हम दोनों दर्पण में दिख रहे थे,















