होठ पर चुम्मा हम सिर्फ अपने पति को देती है!!” गायत्री रंडी बोली.मैंने उस पर कोई जोर जबरदस्ती करना सही नही समझा। क्यूंकि मेरा मानना था की कोई लड़की जान बूझकर रंडी तो बनेगी नही। कोई मजबूरी रही होगी। इसलिए मैंने कहा कोई नही। मैंने उसके होठ पीने से खुद को रोक लिया पर मेरा दिल मुझसे बार बार कह रहा था की इतनी खूबसूरत लड़की के होठ चूस लूँ।मैं गायत्री के गाल पर किस करने लगा क्यूंकि उसके होठ पीना मना था गाल चूमना नही। धीरे धीरे मैं उसके सुराही जैसे पतले गाल को चूमने लगा और दांत से उसके गले की नाजुक और पतली खाल को मैं चूमने और खींचने लगा। फिर मैं उस कमाल की खूबसूरत लड़के के नंगे और बेहद चिकने सेक्सी कन्धो को चूमने लगा और दांत से काटने लगा।बिना को भी खूब मजा मिल रहा था। उसने अपनी ब्रा निकाल दी थी। इसलिए नये नये बेहद सेक्सी बूब्स मेरे सामने थे। मैंने उसके बाये स्तन पर अपना हाथ रख दिया तो गायत्री सिसक गयी। मैंने उससे नजरे मिलाने की बहुत कोशिश की पर उसने मेरी तरह नही देखा। फिर मैं हाथ से उसके दूध दबाने लगा। बहुत मजा मिल रहा था दोस्तों। आज कितने दिनों बाद कोई औरत मैंने नंगी देखी थी। मैं जोर जोर से गायत्री रंडी के बूब्स दबाने लगा। वो आह आह करने















