.ऊँ…ऊँ…” स्वस्ति देसी छिनाल की तरह चिल्ला रही थी.ये सुनकर मैं और जोश में आ गया और तेज तेज उसकी चूत का चुकन्दर करने लगा। स्वस्ति सोफे पर झुककर कुतिया बनी हुई थी। उसकी कमर पकड़कर मैं उसका गेम बजा रहा था। उसकी भरी हुई चूत से चट चट की आवाज निकल रही थी जैसे किसी को चांटे पड़ रहे हो।मैं बड़ी रफ्तार में उसको पेल रहा था। मुझे लंड में बड़ा मीठा मीठा अहसास आ रहा था। स्वस्ति कुतिया बनकर अच्छे से चुदवा रही थी। असंख्य बार मेरा मोटा पट्ठा लंड उसकी चूत में घुसा और निकला। मैं नॉन स्टॉप धक्के दे रहा था। इसी बीच स्वस्ति झड़ गयी। उसका पूरा बदन लहराने और कांपने लगा। मुझे ये सब देखकर और मजा आया। फिर जोर जोर के धक्के मारते हुए मैं भी झड़ गया। स्वस्ति हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. …..सी सी सी सी…. हिंदी XXX क्या चंद्रकांत जी से बात हो रही है???” वो बोली.“हाँ मैं चंद्रकांत शुक्ला बोल रहा हूँ”.“सर! ओ हो हो….”करने लगी। मैं मुंह लगाकर उसके पुट्ठे को चाटने लगा। फिर दांत गड़ाकर काटने लगा। स्वस्ति सुसुआने लगी। फिर मैं उसकी बुर को पीछे से किसी चोदू कुत्ते की तरह चाटने लगा।स्वस्ति सिसकियाँ लेने लगी। उसकी बुर पीछे से कुछ जादा ही सेक्सी दिख रही थी। मैं जीभ लगा लगाकर चाटने लगा। अब मेरी क्लाइंट स्वस्ति और जादा गर्म















