ऊँ. ऊँ… ऊँ… उनहूँ उनहूँ….” करती रही। फिर ससुर जी अंदर ही झड़ गये। वो पसीना पसीना हो गये थे। फिर वो चले गये और बाथरूम में जाकर नहाने लगे। उन्होंने पूरा 1 महीना तक मुझे परेशान नही किया। फिर एक बड़ी अच्छी से बनारसी साड़ी लाकर दी। मुझे आँख मारने लगे थे। उस पहली सील तोड़ चुदाई को मैं कभी नही भूल सकती थी। फिर एक दिन फिर से मौसम बन गया था। मैं छत पर सफाई कर रही थी। इतने में बारिश होने लगी। मैं उसमे भीग गयी।मेरी साड़ी ब्लाउस सब कुछ भीग गया। मेरी चूचियां बारिश के पानी में गीली होकर मेरे बदन से चिपक गयी। उसी समय ससुर जी भी किसी काम से छत पर आ गये थे। वो भी भीग गये थे। उनकी नजरे मेरे रसीली भीगी भीगी चूचियों पर जाने लगी थी। उनका लंड भी खड़ा हो गया था। आकर मेरा हाथ पकड़ लिए।“नही नही आज नही ससुर जी!!” मैंने कहने लगी.“तू बेकार में टेंसन लेती है। चल चुदाई का मजा लेते है” वो बोले और मुझे छत पर ही पकड़कर सीने से लगाकर किस करने लगे। मैं नाकाम रह गयी कुछ नही कर सकी। उन्होंने छत पर ही मेरी साड़ी खोल डाली और मुझे नंगा कर दिया। अपने कपड़े उताकर मुझे नंगा किया और मेरे लिप्स पर किस करने लगे। मैं “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ…. हिंदी XXX ऊँ… ऊँ… ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी। बारिश अभी भी बहुत जोरदार हो रही थी। वो पहले आकर मेरे लिस्प पर किस करने लगे। फिर मेरी















