मुझे बार-बार आँखें पौंछनी पड़ रही थी। कलाकार की दुकान को देखकर मैं चौंकी कि मैं सचमुच यहीं आ गई। मैंने गुस्से में टैक्सी वाले को यहीं का पता दिया था।मुझे देखते ही खड़ा हो गया- अरे तुम? करने दो जो करता है। मेरी नजर उसकी पैंट में चेन के पास चली गई। आज मैं अपने बॉयफ्रेंड का वो भी देखना चाहती थी, उसका मौका ही नहीं आया।मैंने कहा- हाँ और नहीं दोनों।“अरे! हिंदी XXX मुझे उस पर दया आने लगी लेकिन कुछ देर तड़पाने का मजा लेना चाहती थी।“और भी देवियों से आशीर्वाद लिया?”“किसी से नहीं, तुम पहली हो।”“और दूसरी?”“कोई नहीं, तुम्हीं आखिरी भी रहोगी… अगर…”“अगर?”“पूरे मन से आशीर्वाद दोगी।”“हूँ… देखती हूँ तुम उतने बुद्धू नहीं हो!” कहते हुए मैंने अपना एक पैर उठाकर उसके एक कंधे पर रख दिया। मेरा घाघरा जमीन पर पड़े दूसरे पैर से थोड़ा ऊपर उठ गया। वह पैर के उस नंगे हिस्से को देखने लगा।“क्या आशीर्वाद चाहिए, बोलो?”उसने सिर उठाकर मुझे देखा और बोला- तुम… तुम खुद एक पूरी की पूरी आशीर्वाद हो।“बहुत चापलूस हो। कुछ ज्यादा नहीं मांग रहे हो?”“तुमने वादा किया था।”वह फिर मेरे उस घाघरे से बाहर निकले पैर को देखने लगा। मैंने पैर के बालों की वैक्सिंग करा रखी थी, उंगलियों में नई नाखूनपॉलिश लगाई थी।“मैंने सिर्फ होली विश करने का वादा किया था, और कुछ नहीं।” कहते हुए मैंने दूसरा पैर उठाकर















