मुझे तो बस बिना कुछ कहे वो सब कुछ मिल रहा था जो में उनसे चाहता था. वो मुझे बहुत अच्छी लगी थी और फिर एक दिन मिस्टर जैन अपने किसी जरुर काम के लिए दस दिन शहर से बाहर चले गये और ठीक उसी दिन मिसेज जैन को अपने घर के किसी काम के लिए बाहर जाना था.उन्होंने मुझसे मदद के लिए पूछा तो मैंने झट से उन्हे हाँ कर दिया और फिर में उन्हे अपनी बाईक पर अपने साथ बैठकर ले गया और कुछ घंटो में काम खत्म होने के बाद मैंने उन्हे उनके घर पर छोड़ दिया और में वहां से जाने लगा, लेकिन तभी उन्होंने मुझे अपने घर के अंदर बुलाया.में उनके कहने पर अंदर चला गया. हिंदी XXX में अब बच्चों की तरह उनके बूब्स को चूसने, दबाने लगा.वो ज़ोर से सिसकियाँ लेकर बोली कि हाँ उह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ा और उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ज़ोर से चूसो और उन्होंने मेरा सर उनके बूब्स पर दबा दिया और फिर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी आह्ह्ह्हहहह हाँ विशाल जानू हाँ ऐसे ही करो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है और फिर कुछ देर बाद उन्होंने मुझे बिल्कुल नीचे आकर उनकी चूत चाटने को कहा.तो मैंने नीचे सरककर उनकी चूत को देखा वो बिल्कुल साफ थी और थोड़ी उभरी हुई थी. उन्होंने मुझसे कहा कि तुम थोड़ी देर बैठो में अभी अपने कपड़े बदलकर आती हूँ















