रंडी मंदिर जाने के बहाने से निकली थी और यहाँ झाड़ी में चुदवा रही है। मैंने खुद से कहा। कोई उसे पहचान ना सके इसलिए उसने स्टाल नही उतारी थी।सायद स्टॉल में वो जादा रहस्यमयी लग रही थी। सायद उस आदमी को उसे चोदने में खास मजा मिले। वो दामिनी के मस्त गोल मम्मो को बड़ी लगन से पी रहा था। ये सब देखकर मुझे तो हार्ट अटैक आने को हुआ। मुझे धक से बुरा लगा। दामिनी ने अपनी आँखे मूँद ली थी।उसने काफी देर तक दामिनी के मम्मे पिए। मैं बार बार यही सोच रहा था राण्ड कितनी भोली, सरीफ लगती है। और बताओ यहाँ सड़क किनारे झाडी में चुदवा रही है। वो मम्मो को हाथ से सहलाता था और फिर दबाता था। मैं आँख लगाकर देख रहा था।फिर उसने दामिनी का पीला मैचिंग सलवार का नारा खोल दिया और निकाल दिया। उस आदमी ने अपनी पैन्ट उतार के बगल में घास पर रख दी जहाँ दामिनी का पीला सलवार रखा था। उसने अपने लण्ड को हाथ से मलकर ताव दिया, लण्ड खड़ा किया।दामिनी के भोंसड़े में डाला पर गया नही। सायद निशाना नही बन पा रहा था। फिर उसने सुखी घास पर ही अंजली के पैरों को उठा दिया, निशाना लगाया और लण्ड अंदर चला गया। वो अजनबी उसे चोदने लगा। बड़े कामुक धक्के वो मार रहा था।दुबली पतली दामिनी










