कुछ दिनों के बाद मेरे पापा की और मित्तल साहब की किसी बात को लेकर अनबन हो गई और हमारा एक दूसरे के घर पर आना जाना बंद हो गया, दो साल तक हम दोनों भी एक दूसरे से नहीं बोले.मेरी सगाई हो गई और जिस दिन मेरी सगाई थी और उसके अगले दिन प्रकृति ने मुझे फोन करके छत पर मिलने आने के लिए कहा और में उससे मिलने हमारी छत पर चला गया, जहाँ वो मुझसे मिलने के लिये इन्तजार कर रही थी. अब वो मेरा लंड अपने एक हाथ से पकड़कर बहुत धीरे धीरे अंदर बाहर करके लोलीपोप की तरह चूस रही थी और में उसकी चूत को चाट चूस रहा था और मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स पर थे.में लगातार बूब्स को भी निचोड़ रहा था, जिसकी वजह से वो जोश में आ रही थी. XXX Hindi तो मेरी बहन ने मुझे उसके घर का अधूरा पता दे दिया, क्योंकि उसको भी पूरा पता मालूम नहीं था.लेकिन अपनी बहन से प्रकृति का फोन नंबर पूछने की मेरी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हुई और अब में अपनी बहन की फोन डायरी उठा लाया, जिसमें बहुत सारे फोन नंबर लिखे हुए थे और अब में नंबर देखने लगा और बहुत देर तक ढूंढने के बाद मुझे उसमें से उसका फोन नंबर मिल गया.















