अगर कोई सहारा न मिला। तो नितेश ने चिंतित होकर पुछा। हां यार गम्भीर समस्या हो जाएगी। आस-पास न तो कोई बाजार है और नही कोई होटल जहां ठहरा भी जा सके। अरुण बोला।चारों दोस्तों ने इधर-उधर नजर दौड़ानी शुरू कर दी, ताकि कोई ठहरने का जगह मिल सके रात भर के लिए। करीब डेढ़ सौ गज के फ़ासले पर चार-पांच कच्ची झोपड़िया बनी हुई थी।”वो देखो उधर कुछ घर है’‘ नितेश बोला।”अरे यार वो तो छोटी छोटी झोपड़िया हैं, वहां हमलोग कैसे ठहर सकते हैं’‘अरुण बोला।”मजबुरी में सब चलता है यार। मैं उनलोगों से बातचीत करके देखता हूँ कि रात भर भी किसी तरह ठहरा जा सकता है या नहीं।’‘ ऋतिक बोला।‘‘ठीक है, जाकर पता लगाकर जल्दी आओ’‘ शुभम ने कहा।यह सुनकर ऋतिक बढ़ गया उन झोपड़ियां की ओर। पक्की सड़क से कच्ची सड़क निकली जो उन झोपड़ियों की ओर ही जाती थी। उसी कच्ची सड्क के सहारे ऋतिक चल पड़ा।।एक झोपड़ी के नजदीक पहुंचकर ऋतिक ने आवाज लगाई,’‘कोई है’‘‘‘क्या बात है ?’‘कहते हुए एक जवान महिला अंदर से निकली। वह देखने में थोड़ी काली थी लेकिन उसका बदन गठा हुआ था।और चेहरे पर जवानी की चमक थी।‘‘हमलोग दूर जा रहे थे। कि हमारी गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो गया। क्या हमलोग रात भर यहां किसी तरह रूक सकते हैं। सुबह तक कोई न कोई व्यवस्था हो जाएगी’‘ऋतिक बोला।महिला ने ऋतिक















