ऑन दा होल मैं एक सीधी साधारण सी लड़की हू. हिंदी XXX सर मेरे बदन पे पड़े मुझ से बातें कर रहे थे और मुझे प्यार कर रहे थे इतने मे एलेक्ट्रिसिटी आ गयी और कमरे का बल्ब रोशन हो गया और एक दम से हमारी आँखें चुन्धिया गयी और ऑटोमॅटिकली बंद हो गयी फिर थोड़ी देर मे हम ने आखें खोली और सर मेरे बदन से लुढ़क के मेरे साइड मे लेट गये.उनका लंड मेरी फटी चूत को जैसे ढक्कन से सील करते है वैसे अंदर घुस के सील किया हुआ था और मेरी फटी हुई चूत मे से बाहर निकलते ही जैसे बॉटल का ढक्कन खुल गया और मुझे ऐसा लगा जैसा मेरे बदन का ही कोई हिस्सा मेरे बदन से निकल गया हो और चूत एक दम से खाली खाली महसूस होने लगी.और लंड के बाहर निकलते ही मेरी चूत मे जो हम दोनो की मिक्स मलाई इकट्ठा हो गयी थी और मेरी चूत पे उनके लंड का ढक्कन लगा था और वो खुल गया और साथ मे ही मेरी चूत मे से हम दोनो का मिक्स जूस ऐसे निकलने लगा जैसे किसी नदी मे बाढ़ आ गयी हो और बिस्तर पे गिरने लगा.मैं उठ के बैठ गयी और खुली टाँगो के बीच से अपनी दुखती हुई चूत को देखा तो हैरान रह गयी वाहा बिस्तर पे मेरी चूत से निकली















