ये मेरा वादा है”. हिंदी XXX पहले ये सब खुले में होता था. उससे अच्छा ये हुआ कि तुम अब इस परिवार के इन आनंद भरें खेलों में शामिल हो गयी हो मेरी रानी.” शैलेश ने शरारत भरी अदा से बोला.“मुझे तो अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि एक ही परिवार के लोग आपस में ऐसा कर सकते है”, अक्षरा अभी भी हैरान थी.“तुम्हारा सोचना भी जायज़ है. और वैसा ही हुआ भी. मामला थोडा रिस्की था. वो डर था कि अगर सास ससुर ने उसे इस समय देख लिया तो सबकी स्थिति थोडा खराब हो जायेगी. तुम इतना डरी डरी क्यों हो… क्या हुआ?” ससुर ने पूछा.“पापा जी वो उधर …उधर …” अक्षरा को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले.वो सासु मन के कमरे की तरफ देख रही थी. शैलेश अपने हाथ उसकी चुन्चियों पर ले आया और लगा सहलाने.उसने अपने होंठ अक्षरा के होंठों पर रख दिये और लगा अक्षरा के यौवन का रसपान करने. आँखें सुन्दर और बड़ी बड़ी थीं. उसने अपनी गांड को उठा कर जैसे रमाकान्त के लंड को निमंत्रण दिया. आह आह कि आवाजें पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं. शैलेश तो जैसे पागल हो उठा. अगले एक हफ्ते के अन्दर सारे मेहमान अपने घर चले गए.और घर में जीवन सामान्य दिनचर्या में चलने लगा.















