लेकिन दिनेश सुन ही नहीं रहा था। पहली बार मम्मी दिनेश के पास अचानक गई तो वो तैयार नहीं था.लेकिन आज दिनेश फुल तैयारी से ताकत की गोलियां खाकर आया था। दिनेश का पप्पू बैठने का नाम नहीं ले रहा था। मम्मी बेदम होकर छटपटा रही थी। दिनेश ने मम्मी के मम्मों पर हाथ जमा रखें थे जिससे उन्हें काफी दर्द हो रहा था। अब दिनेश ने अपनी रफ़्तार कम कर दी।मम्मी को राहत मिली। थोड़ी देर में दिनेश का पानी छूट गया। मम्मी पहले ही पानी छोड़ चुकी थी। दिनेश निढाल होकर मम्मी की बगल में लेट गया। मम्मी लंबी लंबी सांसे भर रही थी। दिनेश ने मम्मी को बाहों में भर लिया और मम्मी के गुलाबी होंठों का रसपान करने लगा।आधा घंटा दोनों यो ही चिपक कर होंठों को चूसते रहे। मम्मी के होंठों पर खूनी लालिमा उभर आई। दिनेश का पप्पू फिर रेडी था। अब दिनेश ने पलट कर उल्टा कर दिया और मम्मी के उपर चढ़ कर अपने नीचे दबा लिया। मम्मी हिल नहीं पा रही थी। दिनेश मम्मी के गुदाज नितंबों को सहलाने लगा।दिनेश अपना मोटा लन्ड मम्मी की गांड़ पर टिका दिया। मम्मी को जैसे ही एहसास हुआ मम्मी बोली नहीं ये मत करो। दिनेश प्लीज़ शीला मेरी जान बस एक बार। आज मुझे मना मत करो। मम्मी नहीं नहीं प्लीज़ बहुत दर्द होगा। मम्मी दिनेश















