दो दिन बाद में काम पर से घर लौटी तो मुझे अमित के कमरे से आवाज़ें सुनाई दे रही थी. शाम को में शॉपिंग के लिए घर से निकली, मेरे ख़यालों में अभी भी अमित और शुभम का नज़ारा घूम रहा था.मेने सोच लिया था कि में उनपर ज़्यादा नज़र रखूँगी, शायद श्वेता की चुदाई देखने का मौका मिल जाए. हिंदी XXX ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मेने उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा, “शुभम प्लीज़ प्लीज़…..”“प्लीज़ क्या मनीषा बोलो ना? “हाआन्न शुभम डाल दो अपना लंड इसकी गांद मे. वो उसके लंड को चूसने लगी और उसका लंड एक बार फिर पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया.“क्या ये सब कभी रुकेगा कि नही?” मेने अपने आप से पूछा.“मनीषा में एक बार फिर तुम्हारी गांद मारना चाहता हूँ.” शुभम ने अपने लंड को सहलाते हुए कहा.शुभम और श्वेता ने मिलकर मुझे घोड़ी बना दिया. अब मैं उसकी चूत मे अपनी जीब अंदर बाहर कर रही थी. शुभम का पूरा लंड श्वेता की चूत में घुस चुक्का था. में भी अपनी मंज़िल के नज़दीक पहुँच रही थी.“चूऊऊदो राआआआवी आईसस्स्स्स्स्ससे ही हााआअँ ओह मेयरययाया छुउतने वायायेएयेयायायाल हाईईइ.” में उखड़ी सांसो के साथ बड़बड़ा रही थी.“हाआआं प्रीईएटी चूऊऊद डूऊऊ अपनााआ पॅनियीयैयियी मेरे लिईई.” कहकर वो ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया.शुभम मुझे जितनी ताक़त से चोद सकता था चोद















