पर कुछ देर मुझे आराम करने दो अपने ऊपर..!मैंने उससे कहा- लण्ड बाहर निकालो.. मेरा पानी निकाल दो…वो जोश में जोरों से धक्के देने लगा और कहने लगा- हाँ.. हिंदी XXX ‘हाँ’ या ‘ना’..!मैंने उसे कहा- वो पुरानी बात थी, उसे भूल जाओ मैं सोने जा रही हूँ।यह बोल कर मैं दूसरी तरफ मुँह करके सोने चली गई, पर अगले ही पल उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और कहा- अनीशा, मैं आज भी तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ।मैंने उसे धकेलते हुए गुस्से में कहा- क्या कर रहे हो.. वो तो करके सो जाता है.. बगल में दोनों (मैं और मनीष) हैं.. जाग गए तो मुसीबत हो जाएगी!अनूप ने कहा- घुस ही नहीं रहा है, जब धकेलने की कोशिश करता हूँ तो फिसल जाता है।तब अमृता ने कहा- रुको एक मिनट!और उसने तकिये के नीचे हाथ डाला और पैंटी निकाल कर अपनी योनि की चिकनाई को पौंछ लिया और बोली- अब घुसाओ..!मैंने गौर किया तो मुझे हल्का सा दिखा कि अमृता का हाथ उसके टांगों के बीच में है, तो मुझे समझ में आया कि वो अनूप का लिंग पकड़ कर उसे अपनी योनि में घुसाने की कोशिश कर रही है।फिर अमृता की आवाज आई- तुम बस सीधे रहो.. तुम्हारा लण्ड कितना सख्त है..















