मैं बेड के कॉर्नर पे बैठी रही बारिश बड़ी तेज़ हो रही थी और ऐसा लगता था जैसे शाम के 4:30 नही रात के 12 बजे हो. ऑन दा होल मैं एक सीधी साधारण सी लड़की हू. हिंदी XXX सर के चोदने की स्पीड जैसे जैसे बढ़ने लगी मेरा बदन वैसे ही काँपने लगा और मैं ने सर के बॅक को टाइट पकड़ लिया और उनके मूसल लंड पे ही झड़ने लगी. अरे वो तो तीन चार इंच ही अंदर ले के रोने लगती है और मुझे उस पर दया आ जाती है मैं क्या करू और हट जाता हू और फिर वो अपने हाथो से मूठ मारके ही मेरी मलाई निकाल देती है और हस्ते हुए बोले के अब वो मूठ मारने मे पर्फेक्ट हो गयी है.मुझे लगता है के उसको सेक्स मे कोई इंटेरेस्ट नही है मेरी ज़िंदगी बॅस ऐसे ही चल रही है इसी लिए वो यहा मेरे साथ नही रहती मेरी समझ मे नही आता के मैं क्या करू तो मैं ने बोला के सर आप क्यों फिकर करते है अब तो मैं हू ना आपके पास मे तो आपके इस वंडरफुल लंड की दीवानी हो चुकी हू और जब जब मोका मिलेगा मैं आपसे चुदवाती रहूगी और आपके लंड की गर्मी को शांत करती रहूगी.तो वो मुझे बेतहाशा चूमने लगे और बोले के थॅंक्स संजू सच मे आज तुम















