तो उसने कहा मैंने कहा अरे आज मूड हो गया माँ जी, वर्तिका भी नहीं है. हिंदी XXX जैसा की हरेक की ज़िन्दगी के लिए खाना रोज जरूरी है उसी तरह मेरी भी ज़िन्दगी के लिए सेक्स जरूरी था.मैं सेक्स के बिना नहीं रह सकती थी. दोस्तों ये कहानी नहीं बल्कि मेरी ज़िन्दगी है.दो साल पहले मेरे पति का देहांत हो गया, मेरी लहलहाती जवानी को भोगने बाला कोई नहीं बचा, कभी तो लगा की मेरी ज़िन्दगी ख़तम हो चुकी है. दोस्तों ये कहानी नहीं बल्कि मेरी ज़िन्दगी है.दो साल पहले मेरे पति का देहांत हो गया, मेरी लहलहाती जवानी को भोगने बाला कोई नहीं बचा, कभी तो लगा की मेरी ज़िन्दगी ख़तम हो चुकी है. क्यों की मैं घर पर होती थी.एक दिन की बात है, वर्तिका को कंपनी ने दिल्ली से बाहर भेज था कुछ काम के लिए बंगलुरु चार दिन के लिए, तो मैं और विशाल दोनों घर पे थे. अगर आप बियर पि सकती हो तो व्हिस्की भी पि लोगी.उसके बाद हम दोनों के एक एक पेग पि, मैंने सूट में थी तो गर्मी ज्यादा लग रही थी इस वजह से मैंने कहा की मैं कपडे चेंज कर लेती हु. क्यों की मैं घर पर होती थी.एक दिन की बात है, वर्तिका को कंपनी ने दिल्ली से बाहर भेज था कुछ काम के लिए बंगलुरु चार दिन के लिए, तो










